अन्ना हजारे अब नहीं करेंगे आंदोलन, मोदी भरोसे के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ टाला अनशन

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समाजसेवी अन्ना हजारे अब 30 जनवरी से महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि में अनिश्चितकालीन हड़ताल नहीं करेंगे. उन्होंने यह फैसला बीजेपी नेता देवेन्द्र फडणवीस और केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी से मुलाकात के बाद लिया. कैलाश चौधरी ने शुक्रवार को कहा- अन्ना को हमने आंदोलन ना करने की विनती की, जिसे अन्ना ने स्वीकार कर लिया है।

इससे पहले, अन्ना हजारे ने घोषणा करते हुए कहा था कि वह केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ शनिवार को महाराष्ट्र में अपने गांव रालेगांव सिद्धि में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। शेष पढ़ें विज्ञापन के बाद…

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उन्होंने जारी एक बयान में कहा, “मैं कृषि क्षेत्र में सुधारों की मांग करता रहा हूं, लेकिन केंद्र सही फैसले लेते नहीं दिख रहा है.”

हजारे ने कहा, ”किसानों को लेकर केंद्र कतई संवेदनशील नहीं है, इसीलिए मैं 30 जनवरी से अपने गांव में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर रहा हूं.” 83 वर्षीय अन्ना हजारे ने अपने समर्थकों से अपील भी की कि वे कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए अहमदनगर जिले में स्थित उनके गांव में एकत्र नहीं हों.” उल्लेखनीय है कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

इससे पहले, महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि गांव में मीडिया से बात करते हुए अन्ना हजारे ने कहा था कि वह किसानों के लिए पिछले तीन साल से प्रदर्शन करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार ने मामले को सुलझाने के लिए कुछ भी नहीं किया है. पिछले महीने अन्ना हजारे ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखते हुए चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती है तो वह भूख हड़ताल करेंगे.

गौरतलब है कि हाल में सीनियर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व विधानसभा स्पीकर हीराभाऊ बागड़े ने हजारे से मुलाकात की थी और केन्द्र सरकार की तरफ से लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के बारे में विस्तृत ब्यौरा उन्हें दिया था।