breaking:मरवाही उपचुनाव में भाजपा को समर्थन देने अमित जोगी ने किया ऐलान

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मरवाही। मरवाही उपचुनाव में जनता कांग्रेस का नामांकन रद्द होने बाद यह सवाल उठ रहे थे कि आखिर जोगी कांग्रेस का वोट किस पार्टी के पक्ष में जा सकता है. इन्हीं सवालों के बीच जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़(जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने बयान जारी कर कहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं धरमजीत सिंह और सचिव राजेंद्र राय , प्रमोद शर्मा के भाजपा प्रत्याशी डॉ. गम्भीर को जीताने का निर्णय लिया है. मेरी भाजपा के किसी नेता से आज तक इस सम्बंध में सीधा संवाद नहीं हुआ है पर मैं पार्टी के नेताओं के निर्णय से सहमत हूँ.

बंद कमरे में 1 घण्टे में रणनीति बनी

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह दो दिन से मरवाही में हैं. शुक्रवार के शाम पौने 5 बजे पेन्ड्रा के होटल पिनाकी में, जहां नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी रुके हुए हैं- छजकां के लोरमी क्षेत्र से विधायक धर्मजीत सिंह ने वहां उनसे मुलाकात की और एक घंटे तक चर्चा की. मुलाकात के बाद धर्मजीत सिंह ने कहा कि उनके साथ राजनीतिक चर्चा हुई है. इससे पहले कल नवागांव की जनसभा में गुंडरदेही के पूर्व विधायक आर के राय ने मरवाही में चुनाव प्रचार के लिये भाजपा के मंच में अपनी उपस्थिति दे कर अहसास करा दिया था.

देर रात अमित जोगी ने फेसबुक पर इसकी पुष्टि की

जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने इस बारे में अपने फेसबुक अकाउंट पर इसकी जानकारी दी. अमित जोगी ने अपने फेसबुक वाल पर मरवाही के मतदाताओं से अपील करते हुए कहा है कि कांग्रेस के छल कपट और स्व.अजीत जोगी जी के अपमान का बदला लेने का इससे बेहतर मौका नहीं मिलेगा .

मतदाताओं से ये अपील की अमित ने

अमित ने लिखा , मेरा अपना मानना है कि वैचारिक रूप से क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय दल में स्थायी समझौता सम्भव नहीं है बशर्ते कि राष्ट्रीय दल हमारी स्वराज की भावना का सम्मान करे. किंतु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब कांग्रेस ने मेरे स्वर्गीय पिता जी श्री अजीत जोगी जी के अपमान को अपने प्रचार का मुख्य केंद्र-बिंदु बना ही लिया है और मेरे परिवार को चुनाव के मैदान से छलपूर्वक बाहर कर दिया है, तो ऐसी परिस्थिति में मुझे मेरे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का निर्णय स्वाभाविक और सर्वमान्य लगता है. वैसे भी मुझे पूरी उम्मीद है कि ये उपचुनाव न्यायपालिका की चुनाव याचिका की कसौटी में स्वमेव एक साल के भीतर स्थगित हो जाएगा और मरवाही की जनता को अपनी इच्छा अनुसार विधायक चुनने का अवसर एक बार फिर ज़रूर मिलेगा. मैं अपने स्वर्गीय पिता से स्वर्गवास के बाद उन्हें अपमानित कर रहे कांग्रेस के लोगों के विरुद्ध में वोट देने मरवाही के मेरे परिवार से हाथ जोड़के न्याय देने की अपील करता हूँ. पिता के मरणोपरांत उनका अपमान करने वाले जो ताउम्र उनके टुकड़े पर पले लेकिन उनके अहसान को उनके तेरवी के पहले ही सत्ता की लालच में भूल गए, को सबक़ सिखाने का इस से बेहतर मौक़ा नहीं मिलेगा. मैंने अपनी माँ और पार्टी की वर्तमान सुप्रीमो अजीत जोगी की विधवा और छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे वरिष्ठ विधायक डॉक्टर रेनु जोगी से इस सम्बंध में चर्चा की है और वो इस बात से सहमत है. मेरे पिता के स्वर्गवास के बाद हमारी पार्टी- और परिवार- में उनका निर्णय अंतिम होता है. इसीलिए मैं बड़ी सोच समझकर मरवाही की जनता से कांग्रेस के विरोध में वोट करने की अपील करता हूँ.  जनता से लूटा पैसा, साड़ी, शॉल, बिछिया, दारू और 15000 प्रति वोट भले ही आप ले लें, लेकिन उनकी धमकी में न आएँ और वोट मेरे पिता को अपमानित करने वालों के ख़िलाफ़ ही दें. लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त यही है की वोटिंग मशीन और आपके मतदान के बीच का रिश्ता सर्वथा गोपनीय रहेगा. इसमें किसी की तांक-झांक सम्भव नहीं है. कांग्रेस की एक बार फिर जमानत ज़ब्त कराना हमारा एकमात्र उद्देश होना चाहिए! सही मायने में यही मरवाही के कमिया अजीत जोगी का असली सम्मान होगा और छत्तीसगढ़ के नव-निर्माण में आपका किया मतदान पहला ठोस कदम होगा. एक बार फिर हमारे छत्तीसगढ़ की नियति और भविष्य मरवाही की जागरूक जनता के हाथों में हैं और मुझे पूरा विश्वास है की वो हमेशा की तरह मेरे परिवार के सम्मान की रक्षा करेंगे.

क्षेत्रीय पार्टियों का भविष्य !!

हालांकि ऐसे फैसले से जोगी कांग्रेस पार्टी के अस्तित्व पर संकट गहराता साफ दिख रहा है. अब अमित जोगी के सामने चुनौतियों का अंबार है कि वो अपनी पार्टी को कैसे बचा कर रख पाते हैं. यह लिखना गलत नहीं होगा कि क्षेत्रीय पार्टियों का भविष्य छत्तीसगढ़ में दिखायी नहीं दे रहा है. छत्तीसगढ़ का इतिहास रहा है कि यहां कोई भी क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय पार्टियों के मुकाबले ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया. आपको बता दें कि क्षेत्रीय दल के रूप में छत्तीसगढ़ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ समाज पार्टी, छत्तीसगढ़ विकास पार्टी, जय छत्तीसगढ़ पार्टी आदि मैदान में आती रही हैं. जोगी कांग्रेस के आने के बाद सिर्फ बसपा और जोगी गठबंधन ने अपनी राजनीतिक शक्ति दिखलाते हुए कुछ सीटें जीतकर अपनी विशिष्ट स्थिति प्रदर्शित की. लेकिन अब ये पार्टी भी टूटती नज़र आ रही है. इससे पहले बीजेपी से अलग होकर ताराचंद साहू ने स्वाभिमान मंच बनाया था जो बाद में बीजेपी में ही विलय हो गयी. उससे पहले एनसीपी को छत्तीसगढ़ में खड़ा करने के लिए विद्याचरण शुक्ल ने भी कांग्रेस छोड़ा था लेकिन फिर कांग्रेस में ही वापसी करनी पड़ी थी.