Video: धमतरी में गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक दृश्य: 47 लाख के इनामी नक्सली बने लोकतंत्र के मेहमान, तिरंगे के सामने छलक उठीं आंखें
धमतरी जिले में गणतंत्र दिवस का समारोह इस बार ऐतिहासिक और भावुक रहा। कभी हथियार उठाने वाले इनामी नक्सली अब लोकतंत्र के उत्सव में शामिल होकर तिरंगे के सामने भावुक हो उठे। यह दृश्य नक्सलवाद से मुक्त हुए जिले में शांति, विश्वास और पुनर्वास की जीत का प्रतीक बन गया।

रायपुर, 27 जनवरी 2026 : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गणतंत्र दिवस समारोह इस बार खास रहा। नक्सलवाद से मुक्त हुए जिले में पहली बार सरेंडर किए गए नक्सली खुले मंच पर शामिल हुए। 47 लाख रुपये के इनामी रहे 9 हार्डकोर नक्सलियों ने तिरंगे को सलामी दी और लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया।
नक्सल मुक्त जिले का ऐतिहासिक दिन
धमतरी जिले में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह इस बार इसलिए विशेष रहा क्योंकि 47 लाख रुपये के इनामी 9 सरेंडर नक्सली भी इसमें शामिल हुए। एकलव्य खेल मैदान में ध्वजारोहण, पुलिस परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच इन नक्सलियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौटने के निर्णय को महत्वपूर्ण बताया।
सरेंडर नक्सलियों की पृष्ठभूमि
- ये नक्सली नगरी और सीतानदी एरिया कमेटी तथा मैनपुर लोकल गुरिल्ला स्क्वाड से जुड़े थे।
- इन पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
- इनमें से कई महिला नक्सली भी शामिल थीं, जिन्होंने वर्षों तक जंगलों में रहकर हिंसक गतिविधियों में भाग लिया था।
तिरंगे के सामने भावुक हुए नक्सली
गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब तिरंगा लहराया गया तो सरेंडर नक्सली भावुक हो उठे।
- उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का नया अध्याय है।
- बंदूक छोड़कर संविधान और लोकतंत्र को अपनाना उनके लिए गर्व का क्षण है।
- समारोह में मौजूद जनता ने भी इस दृश्य को भावुक होकर देखा और तालियों से स्वागत किया।
सम्मान और पुनर्वास
समारोह के मुख्य अतिथि कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने सरेंडर नक्सलियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
- उन्होंने कहा कि मुख्यधारा में लौटने का यह फैसला पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है।
- सरकार और प्रशासन उनके पुनर्वास में हर संभव सहयोग करेगा।
- सरेंडर नक्सलियों को शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि वे समाज में नई पहचान बना सकें।
शांति और लोकतंत्र की जीत
धमतरी का यह दृश्य केवल एक समारोह नहीं, बल्कि शांति और पुनर्वास की जीत की कहानी है।
- जो लोग कभी लोकतंत्र के खिलाफ हथियार उठाए हुए थे, आज वही लोकतंत्र के उत्सव में सम्मान के साथ शामिल हुए।
- यह घटना छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत और शांति की दिशा में एक बड़ा कदम है।
धमतरी जिले का गणतंत्र दिवस समारोह इस बार इतिहास में दर्ज हो गया। नक्सलवाद से मुक्त हुए जिले में सरेंडर नक्सलियों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि बंदूक की जगह संविधान और तिरंगे ने जीत दर्ज की है। यह दृश्य न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए शांति और विकास की नई सुबह का प्रतीक है।



