अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला: डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ अवैध घोषित, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी

Raipur – यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। फिलहाल ये टैरिफ प्रभावी रहेंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
ट्रंप ने फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया और चेतावनी दी कि यह अमेरिका को आर्थिक तबाही की ओर ले जाएगा।
ट्रंप की टैरिफ नीति को कानूनी झटका, कोर्ट ने बताया अधिकारों का उल्लंघन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी विवादास्पद टैरिफ नीति पर बड़ा कानूनी झटका लगा है।
वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया और अपनी शक्तियों की सीमा लांघी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के बाद भी टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं है।
यह अधिकार अमेरिकी संविधान के अनुसार केवल कांग्रेस को प्राप्त है। फैसले में कहा गया कि IEEPA में टैरिफ, ड्यूटी या टैक्स लगाने की कोई स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई है।
फैसले की प्रमुख बातें
- ट्रंप द्वारा लगाए गए “reciprocal tariffs” और चीन, कनाडा, मैक्सिको पर लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित किया गया।
- स्टील और एल्युमिनियम पर लगे टैरिफ इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
- कोर्ट ने टैरिफ को तुरंत रद्द नहीं किया, बल्कि 14 अक्टूबर तक प्रभावी रहने की अनुमति दी ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके।
ट्रंप का तीखा रिएक्शन और सुप्रीम कोर्ट की तैयारी
फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण करार दिया और चेतावनी दी कि अगर टैरिफ हटाए गए तो अमेरिका को वित्तीय तबाही का सामना करना पड़ेगा।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कानून के अनुसार ही कार्य किया और अंततः जीत उनकी ही होगी।
ट्रंप ने यह भी कहा कि टैरिफ अमेरिकी किसानों, मैन्युफैक्चरर्स और वर्कर्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से बचाते हैं और अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं।
कानूनी और आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को बरकरार रखता है, तो ट्रंप प्रशासन को अरबों डॉलर के आयात शुल्क वापस करने पड़ सकते हैं। इससे अमेरिकी ट्रेजरी को बड़ा नुकसान हो सकता है।
यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों पर भी असर पड़ सकता है।
ट्रंप की टैरिफ नीति ने पहले ही वैश्विक बाजारों को अस्थिर किया है और अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों के साथ तनाव बढ़ाया है।
पृष्ठभूमि: ट्रंप की टैरिफ रणनीति और कानूनी चुनौती
ट्रंप ने अप्रैल 2025 में “Liberation Day” के नाम पर वैश्विक टैरिफ की शुरुआत की थी। उन्होंने IEEPA का हवाला देते हुए चीन, मैक्सिको, कनाडा और यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे। उनका दावा था कि ये टैरिफ अमेरिका को मजबूत और समृद्ध बनाएंगे।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA में टैरिफ लगाने की कोई स्पष्ट भाषा नहीं है और यह राष्ट्रपति को असीमित शक्ति नहीं देता।
यह मामला दो मुकदमों के माध्यम से कोर्ट तक पहुंचा, जिसमें छोटे व्यापारियों और कुछ राज्यों ने चुनौती दी थी।
निष्कर्ष
यह फैसला न केवल ट्रंप की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाता है, बल्कि भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए भी एक मिसाल कायम करता है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब निर्णायक होगी। अगर कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला देता है, तो यह अमेरिका की व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।