रायपुर में एन.डी.पी.एस. एक्ट पर एक दिवसीय कार्यशाला, पुलिस-न्यायालय की संयुक्त पहल
कार्यशाला में प्रक्रियात्मक त्रुटियों को दूर करने और दोषसिद्धि दर बढ़ाने पर दिया गया विशेष ध्यान

रायपुर । न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर के सभागार में आज एन.डी.पी.एस. एक्ट की विवेचना को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रायपुर पुलिस और माननीय न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें जिले के 150 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि रायपुर पुलिस नशे को जड़ से समाप्त करने हेतु संकल्पित है। इसे केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक नैतिक संकल्प के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को प्रक्रियात्मक त्रुटियों को दूर कर दोषसिद्धि दर बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.पी. वर्मा ने कहा कि एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई रायपुर को नशे से मुक्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। विवेचना की गुणवत्ता तभी बढ़ेगी जब छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक बातों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या न्यायालय की नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विशेष न्यायाधीश श्री पंकज कुमार सिन्हा ने एन.डी.पी.एस. एक्ट के कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए विवेचना में होने वाली सामान्य त्रुटियों को रेखांकित किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती किरण थवाईत ने नियमों और धाराओं की बारीकियों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों का ज्ञानवर्धन किया। कार्यशाला में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देते हुए न्यायाधीशों ने विवेचना के दौरान आने वाली चुनौतियों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यशाला के समापन पर यह विश्वास व्यक्त किया गया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण सत्र पुलिस अधिकारियों को विवेचना की प्रक्रिया में दक्ष बनाएंगे, जिससे एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत दोषसिद्धि दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रायपुर पुलिस ने भविष्य में भी ऐसे मार्गदर्शन सत्रों के आयोजन की प्रतिबद्धता जताई।