संविधान के खिलाफ 14वां मंत्री? भूपेश बघेल ने उठाए सवाल
भूपेश बघेल का आरोप: विष्णुदेव साय ने तोड़ा अनुच्छेद 164(1A)




रायपुर । छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार द्वारा किए गए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस विस्तार को संविधान के अनुच्छेद 164(1A) का उल्लंघन बताते हुए इसे असंवैधानिक और ग़लत करार दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से एक अतिरिक्त मंत्री को तत्काल हटाने की मांग की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को अपने मंत्रिमंडल में 14वें सदस्य को शामिल कर शपथ दिलाई। इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सदस्य हैं, और संविधान के अनुसार मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 13 सदस्य ही हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार या किसी न्यायालय से विशेष अनुमति ली गई है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 164(1A) भारतीय संविधान में 91वें संशोधन अधिनियम, 2003 के तहत जोड़ा गया था, जो 1 जनवरी 2004 से प्रभावी हुआ। इसका उद्देश्य राज्यों में मंत्रिमंडल के आकार को सीमित करना और दल-बदल को रोकना था। इस प्रावधान के अनुसार, किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
भूपेश बघेल ने 2018 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें संसदीय सचिवों की नियुक्ति को संविधान का उल्लंघन नहीं माना गया था। उस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि मंत्रिमंडल का आकार मुख्यमंत्री सहित 13 सदस्यों तक सीमित रहना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि यह विस्तार असंवैधानिक है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस विस्तार के लिए केंद्र या न्यायालय से कोई अनुमति ली गई है, और यदि नहीं, तो एक मंत्री को तत्काल हटाया जाना चाहिए।