‘ये बिगड़े हुए शहजादे हैं’, कंगना रनौत ने संसद में विपक्ष के हंगामे पर बोला हमला, गृह मंत्री पर कागज फेंकने की घटना को बताया ‘शर्मनाक’

मानसून सत्र के अंतिम दिन संसद में विपक्ष के हंगामे को लेकर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को “बिगड़े हुए शहजादों” जैसा बताया और कहा कि इससे जनता और देश का नुकसान होता है।

कंगना ने गृह मंत्री अमित शाह पर कागज के गोले फेंकने की घटना को “शर्मनाक” और “असभ्य” करार दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम में सुधार के लिए लाए गए विधेयक पर विपक्ष के विरोध को भी अनुचित ठहराया।

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र गुरुवार को हंगामेदार तरीके से समाप्त हो गया, जिसमें विपक्षी दलों ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने विपक्ष को “बिगड़े हुए शहजादे” बताते हुए कहा कि उनका व्यवहार देश की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है।

सत्र के आखिरी दिन भी हंगामा जारी

संसद सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। कंगना रनौत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “सत्र का आखिरी दिन था। अध्यक्ष ने कहा कि यह सत्र जैसा गया, वैसा अपेक्षित नहीं था। हमें 120 घंटे की चर्चा करनी थी, लेकिन कुछ भी नहीं हो पाया। बहुत ही कम सवालों के मौखिक जवाब दिए जा सके। स्पीकर ने हंगामा करने वालों को भी काफी फटकार लगाई है। इस व्यवहार से जनता के साथ देश का भी काफी नुकसान होता है।”

लोकसभा स्पीकर ने भी सत्र की कार्यवाही बाधित होने पर निराशा व्यक्त की। संसद सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित हुए, लेकिन निर्धारित 120 घंटे की चर्चा के बजाय दोनों सदनों में मिलाकर सिर्फ 74.7 घंटे ही काम हो सका।

‘फेक वोटर्स’ के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

कंगना ने विधेयक पर विपक्ष के हंगामे को लेकर कहा, “ये जो कह रहे हैं कि वोट्स फर्जी होते हैं या गड़बड़ी है, तो उनसे मैं कहना चाहूंगी कि एसआईआर (Systematic Identification and Review) प्रक्रिया तो पुरानी सरकारों के दौर में भी चलती थी। अब कोशिश उसे सेनेटाइज करने की हो रही है। वो चाहे घुसपैठिये हों, फेक वोटर्स हों, या डबल वोटर्स हों, सबकी पहचान जरूरी है। मैं पूछना चाहूंगी कि अगर उचित कार्य हो रहा है तो उसमें इनको जलन क्यों हो रही है? इनको तो हमारा साथ देना चाहिए।”

गौरतलब है कि हाल ही में विपक्ष, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, ने मतदाता सूची में कथित ‘फेक वोटर्स’ होने का आरोप लगाया था। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि मतदाता सूची में जीरो नंबर वाले पते का मतलब फर्जी मतदाता नहीं होता, बल्कि यह उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जिनके पास कोई निश्चित पता नहीं होता, जैसे कि बेघर लोग। सरकार का तर्क है कि इस तरह के विधेयक पारदर्शिता लाएंगे और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करेंगे।

गृह मंत्री पर कागज फेंकने की घटना पर नाराजगी

कंगना रनौत ने गृह मंत्री अमित शाह पर विधेयक की कॉपी फाड़कर फेंकने की घटना पर भी कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे “बेहद शर्मनाक” और “किसी भी सभ्य समाज को शर्मिंदा करने वाला” बताया। उन्होंने कहा, “संसद में जो हुआ, जिस तरह का दृश्य हमने देखा, वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मिंदा कर देगा। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर रहे थे, तब विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने उनका माइक हटाने की कोशिश की। उन्होंने विधेयक को फाड़कर गृह मंत्री अमित शाह के मुंह पर फेंक दिया। संसद के भीतर ऐसा कब तक चलता रहेगा, यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है।”

विपक्ष ने उस विधेयक का जोरदार विरोध किया, जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने पर पद से हटाने का प्रावधान था। विपक्ष का आरोप था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह विधेयक जवाबदेही सुनिश्चित करने और पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है।

कंगना ने इस घटना को लोकतंत्र के मंदिर में मर्यादा का उल्लंघन बताया और कहा कि इस तरह की बेतुकी बातें और हंगामा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “इनको तो हमारा साथ देना चाहिए। इस तरह से हंगामा करना, बेतुकी बातें करना, किसी तरह का एक्शन भी नहीं लेना, सॉरी भी नहीं बोलना, तो मैं तो कहूंगी ये बिगड़े हुए शहजादे हैं।”

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button