Panchang: 21 अगस्त 2025 का पंचांग, मुहूर्त और धार्मिक महत्व जानिए विस्तार से
मासिक शिवरात्रि, पुष्य नक्षत्र और प्रदोष व्रत के संयोग में आज का दिन बना है विशेष, लेकिन राहुकाल में रहें सतर्क, जानिए क्या करें और क्या नहीं।

राहुकाल क्या है और क्यों माना जाता है अशुभ
राहुकाल वैदिक ज्योतिष का वह समय है जब राहु ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक होता है। यह काल प्रतिदिन अलग-अलग समय पर आता है और इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इस समय में शुरू किए गए कार्यों में बाधा, भ्रम और विफलता की संभावना अधिक होती है।
- राहु ग्रह का स्वभाव: छाया ग्रह, भ्रम और अनिश्चितता का प्रतीक
- प्रभाव: मानसिक अस्थिरता, निर्णय में भ्रम, कार्य में विघ्न
- उपाय: राहु मंत्र का जाप, काले तिल का दान, नीले वस्त्र पहनना
आज का राहुकाल (गुरुवार, 21 अगस्त 2025)
दिन | राहुकाल समय | दिशा शूल |
---|---|---|
गुरुवार | दोपहर 2:02 से 3:39 बजे | दक्षिण दिशा |
राहुकाल में क्या न करें:
- कोई नया कार्य शुरू न करें
- यात्रा, लेन-देन, या पूजा आरंभ न करें
- विवाह, गृह प्रवेश, या शुभ आयोजन से बचें
राहुकाल में क्या करें:
- ध्यान, जप, और आत्मचिंतन
- राहु शांति मंत्र: ॐ रां राहवे नमः (108 बार)
- पूर्व आरंभ किए गए कार्यों को जारी रखें
आज के शुभ मुहूर्त
मुहूर्त | समय |
---|---|
ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:26 से 5:10 बजे तक |
अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:58 से 12:50 बजे तक |
विजय मुहूर्त | दोपहर 2:34 से 3:26 बजे तक |
गोधूलि मुहूर्त | शाम 6:54 से 7:16 बजे तक |
प्रदोष काल | शाम 6:31 से 7:41 बजे तक |
अमृत काल | शाम 5:49 से 7:24 बजे तक |
इन मुहूर्तों में करें:
- पूजा, दान, शुभ कार्यों की शुरुआत
- रुद्राभिषेक, तुलसी पूजन, दीपदान
- व्यापारिक निर्णय, संपत्ति क्रय-विक्रय
आज का पंचांग
| तिथि | त्रयोदशी (दोपहर 12:44 तक), फिर चतुर्दशी
| वार | गुरुवार
| नक्षत्र | पुष्य (अगले दिन 12:08 AM तक)
| योग | व्यतीपात (दोपहर 4:14 तक), फिर वरीयान
| करण | वणिज → विष्टि
| सूर्योदय | सुबह 5:53 बजे
| सूर्यास्त | शाम 6:54 बजे
| चंद्रमा की राशि | कर्क
| सूर्य की राशि | सिंह
आज का धार्मिक महत्व
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है:
- मासिक शिवरात्रि व्रत: भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन
- प्रदोष व्रत: शाम के समय शिव पूजन से विशेष फल की प्राप्ति
- पुष्य नक्षत्र: दान, खरीदारी और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ
- गुरुवार का व्रत: भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर
धार्मिक क्रियाएं:
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें
- रुद्राभिषेक करें
- गाय, वस्त्र, भोजन का दान करें
- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें
अस्वीकरण ( Disclaimer):यह समाचार ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग विवरण और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है। इसमें दी गई भविष्यवाणियाँ, मुहूर्त और राहुकाल संबंधित विवरण किसी वैज्ञानिक प्रमाण या व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं हैं। www.the4thpillar.live इस लेख में प्रस्तुत किसी भी ज्योतिषीय सलाह, समय निर्धारण या धार्मिक व्याख्या की सटीकता या प्रभाव की गारंटी नहीं देता। पाठकों से अनुरोध है कि वे किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और परंपरागत विश्वासों के आधार पर प्रकाशित की गई है।