गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन की हिरासत के बाद पीएम, सीएम और मंत्रियों को पद छोड़ना होगा: मोदी सरकार ने लोकसभा में पेश किए तीन अहम विधेयक




मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी की स्थिति में पद से हटाने के लिए तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए हैं। यदि कोई जनप्रतिनिधि लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन उसे पद छोड़ना होगा या स्वतः पदमुक्त माना जाएगा। विपक्ष ने इस कदम को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।
विधेयकों की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
अब तक भारतीय संविधान में केवल दोष सिद्ध होने पर ही किसी जनप्रतिनिधि को पद से हटाने का प्रावधान था। लेकिन हाल के वर्षों में कुछ नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद उनके पद पर बने रहने को लेकर विवाद बढ़ा है। इसी संदर्भ में मोदी सरकार ने एक नया कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया है, जिससे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार नेताओं को पद छोड़ना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम संवैधानिक नैतिकता, जन विश्वास और सुशासन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। विधेयकों के उद्देश्यों में कहा गया है कि:
“एक मंत्री जो गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होकर हिरासत में है, वह संविधान की गरिमा और जनविश्वास को ठेस पहुंचा सकता है।”
पेश किए गए तीन विधेयक
गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त को लोकसभा में निम्नलिखित तीन विधेयक पेश किए:
विधेयक का नाम | उद्देश्य |
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संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 | अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन कर पीएम, केंद्रीय मंत्री, सीएम और दिल्ली सरकार के मंत्रियों को हटाने का प्रावधान |
केंद्र शासित प्रदेशों का शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 | 1963 के अधिनियम की धारा 45 में संशोधन कर केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को हटाने का प्रावधान |
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 | 2019 के अधिनियम की धारा 54 में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर के मंत्रियों को हटाने का प्रावधान |
इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसकी रिपोर्ट संसद के अगले सत्र के अंतिम सप्ताह में पेश की जाएगी।
क्या कहता है नया प्रावधान
यदि कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन इस्तीफा देना होगा या उसे स्वतः पदमुक्त माना जाएगा।
यह प्रावधान उन अपराधों पर लागू होगा जिनमें कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान है।
यदि प्रधानमंत्री स्वयं हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उन्हें पदमुक्त माना जाएगा।
रिहा होने के बाद संबंधित व्यक्ति को फिर से नियुक्त किया जा सकता है।
विपक्ष का विरोध
कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस प्रस्ताव पर तीखा विरोध जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“क्या दुष्चक्र है! गिरफ्तारी के लिए कोई दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया! विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी धड़ाधड़ और असंगत रूप से हो रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून विपक्ष को अस्थिर करने का हथियार बन सकता है, जहां केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को चुनावी मैदान से बाहर किया जा सकता है।
निष्कर्ष
यह विधेयक भारतीय राजनीति में एक नई संवैधानिक व्यवस्था की ओर इशारा करता है, जहां जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को कानूनी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। लेकिन विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा मान रहा है। आने वाले दिनों में संसद में इस पर गंभीर बहस की संभावना है।