छत्तीसगढ़ पुलिस ने वाहनों पर एक साल में खर्च किए 300 करोड़ से अधिक, जिलेवार खर्च ने उठाए सवाल

सरकारी दस्तावेजों में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान पुलिस विभाग ने वाहनों की खरीदी, मरम्मत, ईंधन और संचालन पर भारी राशि खर्च की। कई जिलों में करोड़ों रुपये खर्च होने से वित्तीय प्रबंधन और प्राथमिकताओं पर बहस तेज।





रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग द्वारा वाहनों पर किए गए भारी खर्च को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें खुलासा हुआ है कि पिछले एक वर्ष के दौरान विभाग ने वाहनों की खरीदी, रखरखाव, ईंधन और अन्य संचालन संबंधी खर्चों पर 300 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की है। यह आंकड़ा विभागीय दस्तावेजों और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए खर्च का विवरण भी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार यह खर्च वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान किया गया, जिसमें पुलिस विभाग के विभिन्न यूनिटों, जिला पुलिस कार्यालयों और विशेष इकाइयों के लिए वाहनों की खरीदी, मरम्मत और संचालन संबंधी मद शामिल हैं। इस खर्च को लेकर प्रशासनिक हलकों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

पढ़े रिपोर्ट – 

1011338165-Chhattisgarh-Police-Vehicle-Report

वाहनों की खरीदी और रखरखाव पर बड़ा बजट

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस विभाग के पास राज्यभर में हजारों सरकारी वाहन संचालित होते हैं, जिनका उपयोग कानून व्यवस्था बनाए रखने, गश्त, नक्सल विरोधी अभियान, वीआईपी ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है।

इन वाहनों के लिए हर साल बड़ी राशि ईंधन, सर्विसिंग, स्पेयर पार्ट्स और मरम्मत पर खर्च की जाती है। इसके अलावा समय-समय पर नए वाहन भी खरीदे जाते हैं, जिससे कुल खर्च का आंकड़ा काफी बढ़ जाता है।


कई जिलों में करोड़ों रुपये का खर्च

रिपोर्ट में प्रदेश के कई जिलों में वाहनों से संबंधित खर्च का विवरण भी सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार कुछ जिलों में वाहनों के संचालन और रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य का भौगोलिक क्षेत्र बड़ा होने और कई इलाके नक्सल प्रभावित होने के कारण सुरक्षा बलों को लगातार गश्त और ऑपरेशन चलाने पड़ते हैं। इसके कारण वाहनों का उपयोग भी काफी अधिक होता है और खर्च बढ़ना स्वाभाविक है।


नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ज्यादा खर्च

विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर संभाग और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को लगातार ऑपरेशन चलाने पड़ते हैं। ऐसे इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए विशेष प्रकार के वाहन, बुलेटप्रूफ वाहन और अतिरिक्त लॉजिस्टिक व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

इसी कारण इन क्षेत्रों में वाहनों के संचालन और रखरखाव पर अधिक खर्च दर्ज किया गया है।


प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठे सवाल

हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या वाहनों पर इतना बड़ा खर्च उचित है और क्या इसमें पारदर्शिता बरती जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों में वाहनों के उपयोग और खर्च की नियमित ऑडिट व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए ताकि संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।


पुलिस विभाग का पक्ष

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान चलाने के लिए वाहनों की अहम भूमिका होती है।

अधिकारियों के अनुसार यह खर्च विभिन्न मदों में स्वीकृत बजट के तहत किया जाता है और सभी भुगतान सरकारी वित्तीय नियमों के अनुसार होते हैं।


सुरक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी संसाधन

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ जैसे बड़े और संवेदनशील राज्य में पुलिस बल को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गश्त और अभियान के लिए आधुनिक और मजबूत वाहनों की आवश्यकता होती है।

हालांकि इसके साथ ही वित्तीय पारदर्शिता और खर्च की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


To Join Group On Whatsapp Click The Below Link

https://chat.whatsapp.com/CUhjbVTLDLp7l1bZgzfCjT

To Subscribe To Our YouTube Channel Click The Below Link – Click Subscribe – Click The ‘🔔’ Icon

https://youtube.com/c/The4thPillar

Follow Us On X
The 4th Pillar (@pillar_4th) :

https://x.com/pillar_4th?t=Rq7XXAq0q6Gzqduw0_AIUQ&s=08

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button