सरकारी स्कूलों की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने खोली शिक्षा गुणवत्ता की पोल: वंदना राजपूत ने किया भाजपा पर वार,कहा-भाजपा सरकार मध्यम और गरीब बच्चों के भविष्य से कर रही खिलवाड़

56,895 स्कूलों में से 9,540 को मिला 'डी' ग्रेड; कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा- 10,500 स्कूल बंद करने और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाने का दुष्परिणाम





रायपुर । छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत सामने आई सोशल ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों को आधार बनाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय होती जा रही है और यह मध्यम एवं गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

​शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत राज्य के 56,895 सरकारी स्कूलों की सोशल ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 9,540 स्कूलों को ‘डी’ ग्रेड मिला है, जिसका सीधा अर्थ है कि बच्चों को अक्षर ज्ञान तक नहीं हो पाया है।

​वंदना राजपूत ने आगे कहा कि 30,570 स्कूलों को ‘बी’ ग्रेड मिला है, जिसका मतलब है कि इन स्कूलों के बच्चे सिर्फ सामान्य स्तर के हैं। उन्होंने ज़ोर दिया, वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर के लिए बच्चों को उच्च क्वालिटी की शिक्षा ज़रूरी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में शिक्षा के नाम पर सिर्फ और सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है।

शिक्षा विभाग भगवान भरोसे: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाने का आरोप

​प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार की शिक्षा नीति को गलत बताते हुए कहा कि उनकी नीतियों के कारण आज शिक्षा की गुणवत्ता लगातार नीचे गिर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युक्तियुक्तकरण के नाम पर लगभग 10,500 स्कूल बंद किए और कई स्कूलों को आपस में मर्ज कर दिया।

​राजपूत ने कहा कि जब से भाजपा की सरकार प्रदेश में आई है, तब से शिक्षा विभाग भगवान के भरोसे ही चल रहा है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दो सत्र तो बिना शिक्षा मंत्री के निकल गए थे। इसी सत्र में भी विद्यालय खुलने के तीन-चार महीना बाद भी स्कूलों में पाठ्य पुस्तक नहीं मिल पाई थी। उन्होंने एक सहायक शिक्षक के निलंबन का मुद्दा भी उठाया, जिसने पाठ्य पुस्तकों की कमी पर आवाज़ उठाई थी, इसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार का कर्मचारियों के साथ हिटलर शाही जैसा बर्ताव बताया।

शिक्षकों को BLO और ‘आवारा कुत्तों’ की ड्यूटी से पढ़ाई ठप

​वंदना राजपूत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर नीचे गिरना स्वाभाविक था, क्योंकि शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाया जा रहा है। उन्होंने वर्तमान उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षकों को आवारा कुत्तों की जानकारी जुटाने की ज़िम्मेदारी दी गई है।

​उन्होंने शिक्षकों के मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इधर सिलेबस आधा भी नहीं हुआ है और दिसंबर में छैमाही परीक्षा होनी है और फरवरी में बोर्ड परीक्षा है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में, हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं की गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्य के लिए बीएलओ (BLO) के रूप में ड्यूटी लगाने की वजह से स्कूलों में पढ़ाई का बुरा हाल है।

​राजपूत ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि शिक्षक, जो बच्चों के जीवन रूपी इमारत के शिल्पकार होते हैं, उनका लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाए रखने से शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट हो रही है, जिससे मध्यवर्गीय एवं गरीब परिवार के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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