पोरा तिहार में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक,विधायक डॉ. संपत अग्रवाल बोले-पोरा तिहार हमारी मिट्टी से जुड़ी आत्मा है
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया पोरा तिहार,विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने दी शुभकामनाएं




छत्तीसगढ़ की परंपरा में रचा-बसा है पोरा तिहार,बैलों की पूजा और लोकसंस्कृति का है उत्सव : विधायक डॉ संपत अग्रवाल
रायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और कृषि परंपरा का प्रतीक पर्व पोरा तिहार आज पूरे प्रदेश में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजधानी रायपुर स्थित कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निवास पर इस अवसर पर भव्य आयोजन हुआ, जिसमें प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
इस गरिमामयी आयोजन में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने प्रदेशवासियों को पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, पशु-प्रेम और लोक जीवन की आत्मा है। उन्होंने कहा कि पोरा तिहार केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी से जुड़ी संवेदनाओं और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यह दिन हमें खेती-किसानी और पशुधन के महत्व की याद दिलाता है।
विधायक डॉ अग्रवाल ने बताया कि इस दिन किसान अपने खेतों के साथी बैलों को सजाकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा करते हैं। मिट्टी और लकड़ी से बने बैलों की मांग बाजारों में चरम पर होती है। बच्चों के लिए यह पर्व मिट्टी से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझने का माध्यम बनता है।
विधायक ने यह भी कहा कि तीज-त्यौहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अगली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराएं और उनके संरक्षण का प्रयास करें।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में मंत्री निवास पहुंचीं। मंत्री रामविचार नेताम और उनकी धर्मपत्नी ने भी पारंपरिक परिधान में बैलों की पूजा कर लोक आस्था का सम्मान किया। मंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी अंदाज में सजाया गया था, जिससे वातावरण पूरी तरह लोकपर्वमय हो गया।
कार्यक्रम में मंत्रीगण, विधायकगण, मंडल आयोग के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।