भारत के मुख्य न्यायाधीश 22 फरवरी को HNLU के नौवें दीक्षांत समारोह में देंगे दीक्षांत उद्बोधन: रजिस्ट्रार दीपक कुमार श्रीवास्तव

मुख्य न्यायाधीश करेंगे शिलान्यास; शोध के लिए 'आर-हास' ब्लॉक का होगा उद्घाटन, वैश्विक रैंकिंग में HNLU ने गाड़े झंडे।





रायपुर । ​छत्तीसगढ़ के गौरव और देश के अग्रणी विधि शिक्षण संस्थान, हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के नौवें दीक्षांत समारोह की तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दीपक कुमार श्रीवास्तव ने एक औपचारिक पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि आगामी 22 फरवरी 2026 (रविवार) को रायपुर स्थित होटल बेबीलोन कैपिटल के एमराल्ड हॉल में यह भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे और छात्र-छात्राओं को अपना प्रेरक दीक्षांत उद्बोधन देंगे।

कुलाधिपति प्रदान करेंगे उपाधियाँ और स्वर्ण पदक

​रजिस्ट्रार श्रीवास्तव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा करेंगे। उनके कर-कमलों द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को कुल 242 उपाधियाँ प्रदान की जाएंगी, जिनमें 06 पी.एच.डी., 88 एलएल.एम. और 148 बी.ए. एलएल.बी. (ऑनर्स) के छात्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक उत्कृष्टता के शिखर को छूने वाले छात्र-छात्राओं को कुल 36 स्वर्ण पदक से नवाजा जाएगा, जिनमें प्रतिष्ठित कुलाधिपति स्वर्ण पदक और विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक प्रमुख हैं।

दिग्गज हस्तियों का होगा समागम

​समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हाऔर न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण, विभिन्न राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का भी समागम होगा।

50 करोड़ के ऑडिटोरियम का शिलान्यास और अधोसंरचना विस्तार

​विश्वविद्यालय के भविष्यगामी लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान की अधोसंरचना को नया विस्तार मिलेगा। माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में 50 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाले अत्याधुनिक एवं भव्य ऑडिटोरियम का शिलान्यास किया जाएगा। साथ ही, अनुसंधान के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से नवनिर्मित ‘आर-हास’ (रिसर्च हब एंड स्पोक) ब्लॉक का उद्घाटन भी होगा, जिसमें 30 समर्पित अनुसंधान कक्ष और एक हाई-टेक बोर्ड रूम की सुविधा उपलब्ध है।

अकादमिक और शोध के क्षेत्र में वैश्विक कीर्तिमान

​HNLU की हालिया उपलब्धियों का विवरण देते हुए रजिस्ट्रार दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि संस्थान ने ‘WURI’ रैंकिंग की ‘विजनरी लीडरशिप’ श्रेणी में वैश्विक स्तर पर 46वां स्थान और इंडिया टुडे की रैंकिंग में देश भर में 5वां स्थान प्राप्त कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय वर्तमान में ‘जलवायु परिवर्तन विधायन’ और ‘अबूझ माड़िया’ जनजाति की संस्कृति एवं भाषा के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण शोध कार्यों में संलग्न है। इस दिशा में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट जस्टिस कनेक्ट’ के लिए 3.35 करोड़ का अनुदान दिया गया है, जो संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

कर्मचारी कल्याण और सीधा प्रसारण

​संस्थान ने अपने कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए 1 करोड़ की निधि के साथ ‘स्टाफ कम्पैशनेट फंड’ शुरू किया है और चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि को 9,000 से बढ़ाकर 30,000 कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जो लोग समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, वे दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:45 बजे तक HNLU के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकते हैं।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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