सशक्त बचपन, समर्थ प्रदेश: मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना और ‘वजन त्यौहार’ से कुपोषण पर कड़ा प्रहार

​9 से 18 फरवरी तक संचालित विशेष अभियान के तहत देवार जाति की बालिकाओं की स्कूलों में होगी वापसी।





रायपुर/महासमुंद । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुपोषण उन्मूलन की दिशा में चलाए जा रहे ‘मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना’ और ‘वजन त्यौहार’ अभियान के अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। प्रदेश के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ठोस और परिणाममुखी कदम उठाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य शिविर में 80 बच्चों का परीक्षण, 29 को मिला तत्काल उपचार महासमुंद जिले के नयापारा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित विशेष शिविर के दौरान 0 से 5 वर्ष तक के 80 बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच के दौरान 29 बच्चे कुपोषित एवं अति-कुपोषित श्रेणी में पाए गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बिना विलंब किए इन बच्चों को आवश्यक औषधियां, चिकित्सकीय परामर्श और विशेष पोषण किट उपलब्ध कराई। गंभीर मामलों में पालकों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की सुविधाओं की जानकारी देते हुए नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

वजन त्यौहार: आंकड़ों से समाधान की ओर जिले में 9 से 18 फरवरी तक आयोजित ‘वजन त्यौहार’ के अंतर्गत डॉ. सुशील सैमुअल वार्ड (सेक्टर-01) में विशेष कैंप लगाया गया। यहाँ बच्चों की ऊंचाई और वजन का सटीक माप लेकर उनके विकास का डेटा तैयार किया गया। इस डेटा के आधार पर बच्चों को विशेष श्रेणीबद्ध कर उनकी निगरानी की जा रही है। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए आयरन, कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

शिक्षा और सामाजिक समावेशन की नई किरण इस अभियान की एक बड़ी उपलब्धि सामाजिक जागरूकता के रूप में सामने आई है। स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ टीम ने शिक्षा से दूर हो चुकी देवार जाति की चार किशोरियों की पहचान की। अधिकारियों की समझाइश और प्रोत्साहन के बाद इन किशोरियों को पुनः स्कूल में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण है।

विशेषज्ञों की सलाह: पोषण और स्वच्छता है मूल मंत्र शिविर में मौजूद चिकित्सकों ने पालकों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन के शुरुआती 6 वर्ष बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए ‘गोल्डन पीरियड’ होते हैं। विशेषज्ञों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:

  • संतुलित आहार: भोजन में दाल, हरी सब्जियां, दूध, अंडा और मौसमी फलों का अनिवार्य समावेश।
  • स्वच्छता: साफ पेयजल का उपयोग और कृमिनाशक दवाओं का नियमित सेवन।
  • टीकाकरण: समय पर टीकाकरण ही गंभीर बीमारियों से सुरक्षा का एकमात्र उपाय है।

​मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से महासमुंद सहित पूरे प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ एक जन-आंदोलन खड़ा हो गया है, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ नजर आ रहा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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