‘ज्ञान-गति’ के दावों के बीच थमी प्रदेश की तरक्की, कर्ज के दलदल में फंसा छत्तीसगढ़: धनंजय सिंह ठाकुर
पिछला बजट केवल 'जुमला' साबित हुआ, विकास कार्यों के लिए खजाने में पैसे नहीं

रायपुर । छत्तीसगढ़ में आगामी बजट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने साय सरकार के आगामी बजट को ‘आधारहीन आंकड़ों की जादूगरी’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पिछले बजटों को ‘ज्ञान’ और ‘गति’ का नाम तो दिया, लेकिन धरातल पर न तो ज्ञान दिखा और न ही विकास को गति मिली। इसके उलट, प्रदेश की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर हो गई है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज सरकार को चलाने के लिए हर महीने 3500 करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ रहा है। प्रदेश पर कुल कर्ज का भार 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिसके चलते छत्तीसगढ़ का प्रत्येक नागरिक औसतन 65 हजार रुपये का कर्जदार बन चुका है। बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन, स्थापना व्यय और रेवड़ियों (फ्रीबीज) में खर्च हो रहा है, जिससे विकास कार्यों के लिए राशि ही नहीं बच रही।
कांग्रेस प्रवक्ता ने वित्त मंत्री से सीधी जवाबदेही मांगते हुए कई सवाल दागे:
- रोजगार: 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा अब तक क्यों अधूरा है? सीजी पीएससी का दो साल का भर्ती कैलेंडर क्यों नहीं बना?
- आवास: मोदी की गारंटी के तहत 18 लाख नए पीएम आवास में से एक भी स्वीकृत क्यों नहीं हुआ? पुराने आवासों की किस्तें क्यों रोकी गईं?
- किसान व महिला: 7.50 लाख किसानों से धान की खरीदी क्यों नहीं हुई? 40 प्रतिशत महिलाएं आज भी ‘महतारी वंदन योजना’ के लाभ से वंचित क्यों हैं?
- जनहित: बिजली बिल हाफ योजना में मिलने वाली 400 यूनिट की छूट और गरीबों को रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 प्रतिशत की रियायत क्यों खत्म की गई?
धनंजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से फंड की कमी के कारण सड़कों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है। नगरीय क्षेत्रों में विकास कार्य ठप हैं और अनियमित व संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की फाइलें धूल फांक रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब पिछले बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा भी विकास पर खर्च नहीं हो पाया, तो आने वाले बजट से जनता को कोई भी उम्मीद रखना बेमानी है।



