Panchang: आज का दिन धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण; जानिए राहुकाल, शुभ मुहूर्त, पंचांग और पर्वों का महत्व

आज का दिन धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।जानिए राहुकाल, शुभ मुहूर्त, पंचांग और पर्वों का महत्व।
राहुकाल: क्या है, क्यों इससे बचना चाहिए
राहुकाल वह समय होता है जो प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे का होता है और इसे ज्योतिष में अशुभ माना गया है। यह काल राहु ग्रह के प्रभाव में आता है, जो एक छाया ग्रह है। मान्यता है कि इस समय में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, नया व्यापार, यात्रा, पूजा-पाठ या निवेश नहीं करना चाहिए क्योंकि राहु की छाया कार्यों में बाधा, भ्रम और विघ्न उत्पन्न कर सकती है।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय (रायपुर, छत्तीसगढ़ के अनुसार)
समयखंड | अवधि |
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राहुकाल | शाम 5:20 बजे – 6:58 बजे |
यमगण्ड काल | दोपहर 12:25 – 2:03 बजे |
गुलिक काल | सुबह 5:51 – 7:29 बजे |
राहुकाल में क्या न करें:
- नया कार्य शुरू न करें
- यात्रा आरंभ न करें
- विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ या कोई बड़ा निर्णय न लें
- पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान से बचें
राहुकाल में क्या करें:
- ध्यान, जप, तप या आत्मचिंतन
- राहु ग्रह की शांति हेतु मंत्र जाप या दान
- पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है
आज के शुभ मुहूर्त (चौघड़िया आधारित)
मुहूर्त प्रकार | समय |
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चर | सुबह 5:51 – 7:30 बजे |
लाभ | सुबह 7:30 – 9:08 बजे |
अमृत | सुबह 9:08 – 10:47 बजे |
शुभ (शाम) | शाम 6:58 – रात 8:20 बजे |
अमृत (रात) | रात 8:20 – 9:42 बजे |
इन मुहूर्तों में पूजा, दान, यात्रा, नया कार्य आरंभ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
आज का पंचांग (17 अगस्त 2025, रविवार)
तत्व | विवरण |
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तिथि | नवमी (शाम 7:24 तक) |
नक्षत्र | रोहिणी |
योग | व्याघात |
सूर्योदय | सुबह 5:38 बजे |
सूर्यास्त | शाम 6:42 बजे |
चंद्रोदय | 18 अगस्त सुबह 12:24 बजे |
चंद्र राशि | वृषभ |
सूर्य राशि | कर्क |
सिंह संक्रांति | सूर्योदय से रात 9:40 बजे तक |
आज का धार्मिक महत्व
1. गोगा नवमी
लोकदेवता गोगाजी की पूजा का पर्व, विशेष रूप से नागों के भय से मुक्ति और परिवार की रक्षा के लिए मनाया जाता है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विशेष पूजा, मेले और लोकगीतों के आयोजन होते हैं।
2. नंद महोत्सव
श्रीकृष्ण जन्म के उपलक्ष्य में गोकुलवासियों द्वारा मनाया गया आनंदोत्सव। घर-घर में माखन-मिश्री का प्रसाद, भजन-कीर्तन और बच्चों को कृष्ण रूप में सजाने की परंपरा।
3. सिंह संक्रांति
सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश का दिन। इस समय स्नान, दान, जप-तप और तर्पण अत्यंत फलदायी माना गया है। सूर्य की आराधना से आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
समापन टिप्पणी
आज का दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का नहीं, बल्कि लोकजीवन की एकता, सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक ऊर्जा का उत्सव है। राहुकाल से बचते हुए शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य निश्चित रूप से फलदायी सिद्ध होंगे।
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