रायपुर में दो दिवसीय कार्यशाला का आगाज, उच्च शिक्षा मंत्री बोले-2047 के विजन को साकार करेगी नई शिक्षा नीति
वेद, गणित और योग जैसी प्राचीन विधाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर।

रायपुर । शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर में आज से दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली का एकीकरण: एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषय पर आधारित इस आयोजन का उद्घाटन प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा एवं कौशल विकास व तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहब ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक विरासत ही भविष्य का आधार: टंकराम वर्मा
समारोह के मुख्य अतिथि टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन विधाएं जैसे आयुर्वेद, योग, खगोल शास्त्र और गणित केवल अतीत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये आधुनिक चुनौतियों का समाधान प्रदान करती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को पूरा करने का सशक्त माध्यम है। यह नीति विद्यार्थियों में केवल कौशल ही नहीं, बल्कि चरित्र और नैतिकता का भी निर्माण करेगी।
आधुनिकता और संस्कारों का समन्वय: गुरु खुशवंत साहेब
विशिष्ट अतिथि गुरु खुशवंत साहेब ने तकनीकी शिक्षा और संस्कृति के संतुलन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने के साथ-साथ उसे संस्कारों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। नई नीति आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाएगी।
नीति का धरातल पर क्रियान्वयन आवश्यक: डॉ. अतुल कोठारी
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कार्यशाला के वैचारिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एनईपी-2020 का सफल होना इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे कितनी प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारते हैं। उन्होंने समस्त शिक्षाविदों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
दिग्गज शिक्षाविदों का जमावड़ा
इस गरिमामयी अवसर पर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. आलोक चक्रवाल (बिलासपुर), प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव (बस्तर), प्रो. ए.डी.एन. वाजपेई (बिलासपुर), प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत और डॉ. अरुण अरोरा शामिल थे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन सहित प्रदेशभर के कॉलेजों के प्राचार्य और नोडल अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह कार्यशाला अगले दो दिनों तक विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की रूपरेखा तैयार करेगी।



