छत्तीसगढ़ में राशन कार्डों पर सियासत: ‘KYC’ के बहाने 32 लाख गरीबों का राशन रोकने का कांग्रेस ने लगाया आरोप

डेढ़ साल पहले बने कार्डों को रद्द कर जनता को लाइन में खड़ा करना अन्याय : सुशील आनंद शुक्ला





रायपुर । छत्तीसगढ़ में राशन कार्डों के नवीनीकरण और केवाईसी (KYC) की प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार केवाईसी का बहाना बनाकर प्रदेश के 32 लाख राशन कार्डधारियों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित कर रही है।

केवाईसी के नाम पर जनता को परेशान करने का आरोप

​सुशील आनंद शुक्ला ने जारी बयान में कहा कि सरकार पिछले दो महीनों से लाखों उपभोक्ताओं को राशन नहीं दे रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब महज डेढ़ साल पहले ही सभी राशन कार्ड नए सिरे से बनाए गए थे और उस वक्त आधार कार्ड की जानकारी ली गई थी, तो अब अचानक उन्हें रद्द करने का क्या औचित्य है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अपनी फोटो छपवाने और लाभार्थियों की संख्या कम करने के लिए जनता को दोबारा लाइनों में खड़ा कर रही है।

पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं का हवाला

​कांग्रेस प्रवक्ता ने पूर्ववर्ती सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में ‘सार्वभौमिक पीडीएस’ के तहत चपरासी से लेकर कलेक्टर तक और मजदूर से लेकर मालगुजार तक, सभी 81 लाख परिवारों के राशन कार्ड बनाए गए थे। उस समय ग्राम पंचायतों और नगर निगमों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ सूची तैयार की गई थी। लेकिन भाजपा सरकार ने आते ही इन कार्डों को निरस्त कर दिया, जिससे आज भी 32 लाख परिवार राशन के लिए भटक रहे हैं।

भ्रष्टाचार और कालाबाजारी के गंभीर आरोप

​शुक्ला ने भाजपा सरकार पर पीडीएस चावल की कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए कहा:

  • अवैध निर्यात: छत्तीसगढ़ के गरीबों के हक का चावल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के खुले बाजारों में बेचा जा रहा है।
  • कागजी आपूर्ति: आदिवासी क्षेत्रों में नमक और चने की आपूर्ति केवल सरकारी फाइलों तक सीमित है।
  • सत्यापन का अभाव: जब से भाजपा सत्ता में आई है, राशन की दुकानों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) बंद कर दिया गया है।

“भाजपा नेताओं का चारागाह बनी दुकानें”

​कांग्रेस ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सहकारी सोसायटियां और उपभोक्ता दुकानें अब भाजपा नेताओं के लिए ‘चारागाह’ बन चुकी हैं। उन्होंने मांग की है कि केवाईसी के नाम पर राशन रोकना बंद किया जाए और सभी पात्र हितग्राहियों को तत्काल प्रभाव से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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