देशभर में बैंकिंग सेवाएं ठप, मध्यप्रदेश में 40 हजार से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर; एटीएम खाली होने का खतरा, ग्राहकों को भारी असुविधा
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर आज देशभर में बैंक कर्मचारियों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल की। मध्यप्रदेश में 40 हजार से अधिक कर्मचारी शामिल हुए, जिससे 7 हजार से अधिक शाखाओं में कामकाज ठप रहा।

रायपुर, 27 जनवरी 2026 : आज पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं ठप रहीं क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल की। मध्यप्रदेश में इस हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला, जहां करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और 7 हजार से अधिक शाखाओं में ताले लटक गए।
हड़ताल के कारण चेक क्लीयरेंस, नकद लेन-देन, ड्राफ्ट और अन्य बैंकिंग कार्य पूरी तरह ठप रहे। कई जगहों पर एटीएम में नकदी की कमी की आशंका जताई गई है। अनुमान है कि एक ही दिन में लाखों करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन पर असर पड़ सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में बैंक बंद रहे। राजधानी भोपाल में मैदा मिल इलाके में बैंक कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, इस हड़ताल में देशभर के करीब 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। इनमें सरकारी, निजी, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के कर्मचारी भी शामिल हैं। हड़ताल का आह्वान तब किया गया जब 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक विफल रही और सरकार ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया।
बैंककर्मियों का कहना है कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। यूनियनों ने प्रस्ताव रखा है कि सोमवार से शुक्रवार तक कार्य समय को 40 मिनट बढ़ाकर शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि बढ़ते कार्यभार और स्टाफ की कमी के बीच यह कदम जरूरी है।
ग्राहकों को हो रही असुविधा को देखते हुए प्रशासन और बैंक प्रबंधन ने डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को सक्रिय रखने की कोशिश की है। हालांकि निजी बैंकों में कामकाज सामान्य रहा, लेकिन सरकारी बैंकों में सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हुईं।
आज की हड़ताल ने स्पष्ट कर दिया है कि बैंक कर्मचारियों की पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। यदि सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लेते, तो आने वाले समय में ग्राहकों को और भी बड़ी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।



