लिव-इन को कुत्तों का कल्चर बताने वाले अनिरुद्धाचार्य के बयान पर बवाल, युवाओं की तीखी प्रतिक्रिया, धर्मगुरु की मर्यादा पर उठे सवाल

वृंदावन के कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने लिव-इन रिलेशनशिप की तुलना कुत्तों-बिल्लियों से कर दी, जिससे सोशल मीडिया और युवाओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। नोएडा के युवाओं ने इस बयान को धर्म और समाज के लिए अपमानजनक बताया, वहीं कुछ लोगों ने इसे समर्थन भी दिया।






नोएडा: देश में इन दिनों आवारा कुत्तों को लेकर बहस तेज है। सुप्रीम कोर्ट आज इस मुद्दे पर अहम फैसला सुनाने वाला है। इसी बीच वृंदावन के चर्चित कथावाचक अनिरुद्धाचार्य एक और विवाद में घिर गए हैं। उन्होंने हाल ही में लिव-इन रिलेशनशिप पर टिप्पणी करते हुए कहा, “लिव-इन में तो कुत्ते-बिल्ली रहते हैं। हमारे देश के कुत्ते हजारों सालों से लिव-इन में ही रहते हैं। ये लिव-इन कुत्तों का कल्चर है।”

उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा के युवाओं ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया, तो कुछ ने इसे समाज के लिए चेतावनी मानते हुए समर्थन किया।


धर्मगुरु की मर्यादा पर सवाल
नोएडा के एक युवक ने कहा, “धर्मगुरु को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। इससे धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचती है। हमारे बच्चे वेस्टर्न कल्चर की ओर झुक रहे हैं और ऐसे बयान उन्हें धर्म से दूर कर रहे हैं।”

एक अन्य युवक ने कहा, “लिव-इन पर सुप्रीम कोर्ट ने भी समर्थन दिया है। लेकिन कुत्तों-बिल्लियों का उदाहरण देकर अनिरुद्धाचार्य ने सनातन धर्म का अपमान किया है। उन्हें सोच-समझकर बोलना चाहिए।”


कुछ ने समर्थन भी किया
हालांकि कुछ युवाओं ने अनिरुद्धाचार्य की भावनाओं को समझने की अपील की। एक युवक ने कहा, “रिलेशनशिप में रहना अच्छी बात नहीं है। बाबा ने समाज के लिए चेतावनी दी है, उनके शब्दों को समझना चाहिए।”

एक युवती ने कहा, “लिव-इन को लोग प्यार का नाम देते हैं, लेकिन यह हिंदुस्तान का कल्चर नहीं है। यह वेस्टर्न कल्चर है, जिससे समाज प्रभावित हो रहा है।”


सुरक्षा और नैतिकता की चिंता
एक अन्य युवक ने कहा, “लिव-इन में रहना या प्यार करना गलत नहीं है, लेकिन इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। नोएडा में लिव-इन रिलेशनशिप में अपराध बढ़े हैं, कई मामलों में हत्या तक हुई है। धर्मगुरुओं का काम है समाज में नैतिकता बनाए रखना।”


वेब से जुड़ी जानकारी
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में कहा था कि लिव-इन रिलेशनशिप को अपराध नहीं माना जा सकता और यह दो वयस्कों की सहमति पर आधारित है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे संबंधों को सामाजिक स्वीकृति भले न मिले, लेकिन कानून उन्हें मान्यता देता है।

वहीं, आवारा कुत्तों को लेकर दिल्ली नगर निगम और सुप्रीम कोर्ट के बीच बहस चल रही है। कोर्ट ने कहा है कि इंसानों की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन पशुओं के अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए।


निष्कर्ष:
अनिरुद्धाचार्य के बयान ने एक बार फिर धर्मगुरुओं की भूमिका और मर्यादा पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर युवाओं ने उनके बयान को अपमानजनक बताया, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे समाज के लिए चेतावनी मानते हुए समर्थन किया। यह विवाद केवल लिव-इन रिलेशनशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, संस्कृति और आधुनिकता के टकराव का प्रतीक बन गया है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button