छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षु न्यायाधीशों से मिले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, न्यायपालिका की भूमिका पर दिया महत्वपूर्ण संदेश
विधानसभा स्थित कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने की सौजन्य मुलाकात। मुख्यमंत्री ने न्यायिक सेवा में चयन के लिए दी बधाई, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदारी निभाने का दिया संदेश।

रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai से गुरुवार को विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न्यायिक सेवा में चयनित सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए न्यायपालिका की भूमिका और जिम्मेदारियों पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। न्यायिक सेवा में आने वाले अधिकारियों के कंधों पर समाज, संविधान और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी प्रशिक्षु न्यायाधीश निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।
लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका केवल कानून का पालन कराने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों का निर्णय समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन को प्रभावित करता है, इसलिए हर निर्णय में संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों का ध्यान रखना जरूरी है।
न्यायिक सेवा में युवाओं की बढ़ती भागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा न्यायिक सेवा को अपना करियर बना रहे हैं, जो न्याय व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। प्रशिक्षु न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें कानून की गहरी समझ के साथ-साथ समाज की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझना होगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ये सभी अधिकारी न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत करेंगे।
न्यायिक प्रशिक्षण का उद्देश्य
प्रशिक्षु न्यायाधीश वर्तमान में Chhattisgarh State Judicial Academy में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह प्रशिक्षण न्यायिक अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रिया, कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायिक आचरण से संबंधित व्यावहारिक जानकारी देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।
प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विभिन्न न्यायालयों की कार्यप्रणाली, केस मैनेजमेंट, न्यायिक नैतिकता और संवैधानिक प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है, ताकि वे भविष्य में न्यायिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद
इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सांवत, न्यायिक अकादमी की संचालक Nidhi Sharma Tiwari सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी ने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने मुख्यमंत्री से राज्य की न्यायिक व्यवस्था, न्यायिक सेवा के अनुभव और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की।
न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ाने पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका में प्रशिक्षित और संवेदनशील अधिकारियों की भूमिका समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने में अहम होती है। ऐसे संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से न्यायिक अधिकारियों को प्रशासनिक नेतृत्व और शासन व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर भी मिलता है।
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