छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों की अटैचमेंट नियुक्तियां होंगी रद्द, बजट सत्र में स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा ऐलान
ग्रामीण अस्पतालों से शहरों में अटैच कर्मचारियों की नियुक्तियां खत्म करने की तैयारी। विधानसभा के प्रश्नकाल में भुगतान और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी उठा बड़ा मुद्दा।

रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया। सदन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घोषणा की कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में की गई अटैचमेंट नियुक्तियों को रद्द किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, इसलिए कर्मचारियों को मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाएगा।
विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू हुई। इस दौरान विभिन्न विभागों के कामकाज और बजट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे।
ग्रामीण से शहरी अस्पतालों में अटैचमेंट खत्म करने का फैसला
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में कहा कि कई कर्मचारी ग्रामीण अस्पतालों से अटैच होकर शहरों के बड़े अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं। इससे गांवों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी हो रही है और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए यह जरूरी है कि वहां पदस्थ कर्मचारी अपने मूल स्थान पर ही कार्य करें। इसी कारण ग्रामीण से शहरी अस्पतालों में की गई अटैचमेंट नियुक्तियों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
राज्य सरकार पिछले कुछ समय से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
अटैचमेंट व्यवस्था खत्म होने से ग्रामीण अस्पतालों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी और वहां इलाज की सुविधाएं बेहतर हो सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएंगी।
प्रश्नकाल में अपने ही विधायक के सवालों में घिरे मंत्री
विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्री को अपने ही दल की विधायक के सवालों का सामना करना पड़ा। भाजपा विधायक लता उसेंडी ने स्वास्थ्य विभाग में किए गए कार्यों के भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में काम पूरा होने के बावजूद ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया गया है। उनके अनुसार विभाग के कुछ अधिकारी कभी मौखिक वर्क ऑर्डर के आधार पर भुगतान करते हैं तो कभी उसी आधार पर भुगतान से इनकार कर देते हैं।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
लता उसेंडी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकार को गलत जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में करीब नौ महीने पहले कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और जवाब मांगा।
सरकार ने जांच और सुधार का दिया भरोसा
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में कहा कि विभागीय स्तर पर सभी शिकायतों की समीक्षा की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाएगी वहां आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि प्रदेश के सभी नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
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