10 साल तक क्लेम लटकाने पर बीमा कंपनी पर सख्त फैसला, उपभोक्ता आयोग ने 10 लाख भुगतान और मुआवजा देने का दिया आदेश

चोरी हुए वाहन के बीमा क्लेम में लापरवाही महंगी पड़ी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर उपभोक्ता को बीमित राशि, मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने के निर्देश दिए।





रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को उपभोक्ता के साथ लापरवाही बरतने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने चोरी हुए वाहन के बीमा क्लेम को करीब दस वर्षों तक लंबित रखने के मामले में बीमा कंपनी पर 10 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां तकनीकी आधार या दस्तावेजों के बहाने बनाकर उपभोक्ताओं को उनके वैध अधिकारों से वंचित नहीं रख सकतीं। आयोग ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।


2016 में चोरी हुआ था वाहन

मामले की जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता विमल साहू ने वर्ष 2015 में एक वाहन खरीदा था और उसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से कराया था।

जून 2016 में वाहन चोरी हो गया था। घटना के तुरंत बाद शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना पुलिस को दी और संबंधित थाने में मामला दर्ज कराया। इसके साथ ही वाहन चोरी की जानकारी बीमा कंपनी को भी दे दी गई थी, ताकि बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू हो सके।


दस्तावेज जमा करने के बाद भी नहीं हुआ भुगतान

शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी की प्रक्रिया के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज और वाहन की चाबियां जमा कर दी थीं। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने लंबे समय तक बीमा दावे का निपटारा नहीं किया।

कंपनी द्वारा बार-बार यह कहा जाता रहा कि दस्तावेज अधूरे हैं, जबकि शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने सभी आवश्यक कागजात पहले ही जमा कर दिए हैं।


दो बार जाना पड़ा जिला उपभोक्ता आयोग

बीमा कंपनी की ओर से लगातार टालमटोल किए जाने के कारण शिकायतकर्ता को न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

पहली बार वर्ष 2019 में जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में आदेश पारित किया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फिर से सभी दस्तावेज और चाबियां कंपनी को सौंप दीं।

इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दस्तावेज अपूर्ण होने का हवाला देकर भुगतान रोक दिया। अंततः शिकायतकर्ता को दोबारा उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करनी पड़ी।


आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी की अपील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि कंपनी का यह रवैया उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आयोग ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी चोरी हुए वाहन के एवज में उपभोक्ता को बीमित राशि का भुगतान करे।


30 दिनों में भुगतान का आदेश

आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर वाहन की बीमित राशि के रूप में 10 लाख रुपये का भुगतान करे।

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो कंपनी को सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।


मानसिक प्रताड़ना के लिए अलग मुआवजा

आयोग ने यह भी माना कि बीमा क्लेम को इतने लंबे समय तक लंबित रखने से शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

इसलिए आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दे। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के रूप में शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे।


उपभोक्ता अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश जाता है कि यदि किसी कंपनी द्वारा उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है तो न्यायिक मंचों के माध्यम से उपभोक्ता अपने अधिकार प्राप्त कर सकता है।

उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय बीमा कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी माना जा रहा है कि वे उपभोक्ताओं के दावों का निपटारा समय पर और पारदर्शी तरीके से करें।


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Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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