बलरामपुर में 3 एकड़ में अवैध अफीम की खेती का खुलासा, पुलिस-प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई; मामले पर सियासत भी तेज
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के तुर्रीपनी गांव में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती मिलने से हड़कंप। खेत में पक चुके डोडों पर चीरा लगाने के संकेत, पुलिस ने शुरू की जांच; विपक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल।

रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में अवैध नशे के कारोबार को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। इस बार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में करीब ढाई से तीन एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती का खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार जिले की ग्राम पंचायत खजुरी के अंतर्गत आने वाले तुर्रीपनी गांव में यह अवैध खेती की जा रही थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और खेत में लगी अफीम की फसल को जब्त कर जांच शुरू कर दी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार खेत में लगे पौधों के डोडे पक चुके थे और कई जगहों पर उन पर चीरा भी लगाया गया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि अफीम का लेटेक्स निकालने की तैयारी की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित जमीन एक स्थानीय आदिवासी किसान की है जिसे झारखंड के एक व्यक्ति ने लीज पर लिया था। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि इस अवैध खेती के पीछे कौन लोग शामिल हैं और यह कारोबार किस स्तर तक फैला हुआ है।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
सूचना मिलते ही बलरामपुर जिले के कुसमी क्षेत्र में पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने खेत को घेरकर पहले पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और उसके बाद अवैध अफीम की फसल को जब्त करने और नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की।
जांच में पाया गया कि खेत में अफीम के पौधे पूरी तरह विकसित हो चुके थे और उनसे नशीला पदार्थ निकालने की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी। प्रशासन का कहना है कि मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
बताया जा रहा है कि खेती ऐसे इलाके में की गई थी जो जंगल और दुर्गम क्षेत्र के पास है। इस कारण लंबे समय तक इसकी जानकारी प्रशासन तक नहीं पहुंच पाई। ग्रामीणों की सूचना के बाद ही यह मामला सामने आया।
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे हैं ऐसे मामले
छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में अवैध अफीम खेती के कई मामले सामने आ रहे हैं। इससे पहले दुर्ग जिले में भी बड़े पैमाने पर अफीम की खेती पकड़ी गई थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
बलरामपुर में सामने आया यह मामला राज्य में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर प्रशासन की सतर्कता और जांच को और तेज करने की जरूरत की ओर इशारा करता है।
ये तस्वीर आज शाम 4 बजे की है और इसमें दिखाई दे रहे पौधे अफ़ीम के हैं।
ग्राम पंचायत खजुरी के तुर्रीपनी में लगभग 2 एकड़ ज़मीन पर अफ़ीम की खेती होने की गंभीर खबर सामने आई है। चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से इस तरह की घटनाएं लगातार और बार-बार सामने आ रही हैं।… pic.twitter.com/XRYTKRJM3c
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) March 11, 2026
सियासत भी हुई तेज
इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री T. S. Singh Deo ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस घटना को बेहद गंभीर बताया और सरकार तथा प्रशासन पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत खजुरी के तुर्रीपनी गांव में लगभग दो एकड़ से अधिक जमीन पर अफीम की खेती होने की खबर चिंताजनक है और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सिंहदेव ने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरे साल बोई जाने वाली फसलों का रिकॉर्ड प्रशासन के पास रहता है, तो फिर उसकी जानकारी के बिना इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती कैसे हो रही है। उन्होंने इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत का संकेत बताया और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
जांच में जुटी पुलिस, नेटवर्क की तलाश
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल खेत से जुड़े सभी दस्तावेज और पट्टे की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस खेती के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा।
संभावना जताई जा रही है कि अवैध नशे के कारोबार से जुड़े गिरोह दूरस्थ और जंगल से लगे क्षेत्रों में ऐसी खेती कराते हैं ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके।
प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और यदि इसमें किसी बाहरी व्यक्ति या संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो नारकोटिक्स एजेंसियों की भी मदद ली जाएगी।
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