पत्नी का बड़ा खुलासा: हर 5 साल में करता है शादी, चौथी बार दूल्हा बनने से पहले महिला आयोग ने लगाई रोक

बिलासपुर में आयोजित राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में कई मामलों का मौके पर समाधान; बिना तलाक चौथी शादी की कोशिश पर सख्त कार्रवाई के निर्देश।



रायपुर, 11 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक महिला ने अपने पति पर हर पांच साल में पत्नी बदलने का आरोप लगाया। महिला का कहना था कि उसका पति बिना तलाक दिए चौथी शादी करने की तैयारी कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य महिला आयोग ने तुरंत हस्तक्षेप किया और प्रस्तावित शादी पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए।

यह मामला बिलासपुर में आयोजित राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान सामने आया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया कि जब तक पति-पत्नी के बीच कानूनी रूप से तलाक नहीं होता, तब तक दूसरी शादी करना अवैध है। आयोग ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि पति चौथी शादी का प्रयास करता है तो तत्काल कार्रवाई कर उसे रोका जाए।


बिना तलाक दूसरी शादी अवैध, पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश

महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि भारतीय कानून के अनुसार वैध विवाह के रहते दूसरी शादी करना अपराध की श्रेणी में आता है। इस मामले में दोनों पति-पत्नी का विवाह अभी भी कानूनी रूप से मान्य है, इसलिए पति की चौथी शादी का प्रयास पूरी तरह अवैध माना जाएगा।

आयोग ने कोरबा के संरक्षण अधिकारी और पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि यदि पति विवाह की तैयारी करता है तो तत्काल हस्तक्षेप कर शादी रुकवाई जाए। साथ ही पीड़ित महिला को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह अपने पति और इस अवैध विवाह में सहयोग करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है। आयोग के हस्तक्षेप के बाद पति की चौथी शादी की तैयारियों पर फिलहाल रोक लग गई है।


पति-पत्नी के विवाद में आयोग ने कराया समझौता

जनसुनवाई के दौरान एक अन्य मामले में आयोग ने एक टूटते हुए परिवार को फिर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानकारी के अनुसार विवाह के बाद पति काम के सिलसिले में पुणे चला गया था, जहां उसके किसी अन्य महिला से संबंध होने की आशंका पत्नी ने जताई।

पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति और उसके परिवार द्वारा कार की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया गया। सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों को समझाइश दी, जिसके बाद पति-पत्नी साथ रहने के लिए राजी हो गए। इस दौरान पांच माह की मासूम बच्ची पहली बार अपने पिता की गोद में आई, जो लंबे समय से अपने पिता से दूर थी।


मृत व्यक्ति की मानहानि पर कैमरामैन से माफी

जनसुनवाई में एक और मामला सामने आया जिसमें एक कैमरामैन द्वारा सोशल मीडिया पर मृत व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। मृतक की पत्नी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।

मामले की जांच और आयोग की सख्ती के बाद कैमरामैन ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार की और पीड़ित परिवार से माफी मांगी। आयोग ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से जुड़ा मामला बताते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने की सलाह दी।


प्रेम विवाह के 15 दिन बाद पत्नी को घर से निकाला

एक अन्य मामले में प्रेम विवाह के महज 15 दिन बाद पत्नी को जातिगत प्रताड़ना देकर घर से निकालने की शिकायत सामने आई। पीड़ित महिला ने आयोग में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला आयोग ने संबंधित महिला थाना प्रभारी को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। आयोग ने कहा कि किसी भी प्रकार की जातिगत या घरेलू प्रताड़ना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


दिव्यांग महिला कर्मचारी की शिकायत पर जांच

जनसुनवाई में एक नेत्रहीन महिला कर्मचारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर अनावश्यक नोटिस जारी कर मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच के लिए राज्य स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया और दो माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।


संपत्ति विवाद में मां को मिला अधिकार

एक मामले में बेटे द्वारा मां को मकान बेचने से रोकने की शिकायत आयोग तक पहुंची। सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट किया कि संपत्ति पर मां का पूरा अधिकार है और वह अपनी इच्छा से मकान बेच सकती है। समझाइश के बाद बेटा भी इस फैसले से सहमत हो गया। मामले की निगरानी के लिए संरक्षण अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।


जमीन और मुआवजा राशि विवाद में एसडीएम को जांच के निर्देश

जांजगीर-चांपा जिले में एक महिला ने आरोप लगाया कि उसकी सौतेली मां ने 25 लाख रुपये की क्लेम राशि अपने पास रख ली और जमीन पर कब्जा कर लिया। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एसडीएम को जांच कर पीड़िता को उसका अधिकार दिलाने के निर्देश दिए हैं।


159 मामलों की सुनवाई, कई का मौके पर समाधान

महिला आयोग की इस महा जनसुनवाई में बिलासपुर संभाग के आठ जिलों से कुल 159 प्रकरणों की सुनवाई की गई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता वाली न्यायपीठ ने इनमें से 34 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया।

आयोग के अनुसार इस प्रकार की जनसुनवाई का उद्देश्य महिलाओं को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना और घरेलू, सामाजिक तथा संपत्ति से जुड़े विवादों का समय रहते समाधान करना है।

To Join Group On Whatsapp Click The Below Link

https://chat.whatsapp.com/CUhjbVTLDLp7l1bZgzfCjT

To Subscribe To Our YouTube Channel Click The Below Link – Click Subscribe – Click The ‘🔔’ Icon

https://youtube.com/c/The4thPillar

Follow Us On X
The 4th Pillar (@pillar_4th) :

https://x.com/pillar_4th?t=Rq7XXAq0q6Gzqduw0_AIUQ&s=08

 

 

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button