भारत की अर्थव्यवस्था ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: Q1 FY26 में 7.8% की GDP ग्रोथ, अमेरिका-चीन को पीछे छोड़ा
लगातार पांचवीं तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ दर में उछाल, वैश्विक मंदी के बीच बनी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था।

रायपुर, 30 अगस्त 2025 : भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपने दमखम का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में देश की वास्तविक GDP ग्रोथ दर 7.8% रही, जो न सिर्फ अनुमान से अधिक है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सबसे तेज़ है। यह ग्रोथ दर अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर अग्रणी बना रही है।
पिछली पांच तिमाहियों में लगातार तेज़ी
भारत की GDP ग्रोथ का यह सिलसिला वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही से शुरू हुआ था। तब से अब तक हर तिमाही में ग्रोथ दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है:
तिमाही | GDP ग्रोथ दर |
---|---|
Q2 FY25 | 5.6% |
Q3 FY25 | 6.4% |
Q4 FY25 | 7.4% |
Q1 FY26 | 7.8% |
इस निरंतर वृद्धि ने भारत को वैश्विक मंदी के बीच एक स्थिर और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है।
वैश्विक तुलना: भारत सबसे आगे
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका की GDP ग्रोथ FY25 में 1.5% अनुमानित है, जबकि चीन की ग्रोथ दर 5.2% रही। भारत ने इन दोनों को पीछे छोड़ते हुए न सिर्फ ग्रोथ में बढ़त बनाई बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद बाजार के रूप में उभरा है।
सेक्टोरल परफॉर्मेंस: सेवा और निर्माण क्षेत्र में उछाल
MOSPI द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र में 9.3% की ग्रोथ दर्ज की गई है, जबकि निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में क्रमशः 7.6% और 7.7% की वृद्धि हुई। कृषि क्षेत्र ने भी 3.7% की स्थिर ग्रोथ दिखाई, जो मानसून की नियमितता का संकेत देता है।
मांग और निवेश में मजबूती
इस ग्रोथ के पीछे घरेलू मांग, निजी निवेश और सरकारी खर्च की भूमिका अहम रही है। निजी खपत और निवेश में 7–8% की वृद्धि हुई है, जबकि सरकारी खर्च में लगभग 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अब मांग-संचालित और निवेश-प्रेरित मॉडल की ओर बढ़ रही है।
ट्रंप की टिप्पणी और भारत की जवाबी ग्रोथ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी‘ कहे जाने के बाद यह ग्रोथ दर एक प्रत्यक्ष जवाब बनकर सामने आई है। भारत ने न सिर्फ इस आलोचना को खारिज किया बल्कि अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि वह अब वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दौड़ में ‘डैडी‘ बन चुका है।
चुनौतियां और आगे की राह
हालांकि, अमेरिकी निर्यातों पर 50% टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते कुछ जोखिम बने हुए हैं। लेकिन GST दरों में संभावित कटौती, नीतिगत सुधार और घरेलू मांग की मजबूती भारत को इन चुनौतियों से पार पाने में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष
भारत की अर्थव्यवस्था अब सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक भरोसेमंद, स्थिर और तेज़ी से बढ़ती ताकत बन चुकी है। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो भारत जल्द ही जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
डिस्क्लेमर : (Disclaimer)
यह रिपोर्ट www.the4thpillar.live के संपादकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार की गई है। इसमें प्रस्तुत आंकड़े आधिकारिक स्रोतों और सार्वजनिक डोमेन से लिए गए हैं।