Panchang: 28 अगस्त 2025 का पंचांग विशेष, जानिए आज का राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
राहुकाल की रहस्यमयी घड़ी, क्यों टालना चाहिए शुभ कार्य




राहुकाल हिंदू ज्योतिष का एक ऐसा समयखंड है जिसे अशुभ माना जाता है।
यह काल हर दिन अलग-अलग समय पर आता है और इसका निर्धारण सूर्य के उदय और अस्त के बीच की अवधि के आधार पर होता है।
राहुकाल का संबंध राहु ग्रह से है, जिसे छाया ग्रह माना जाता है और यह भ्रम, बाधा और अनिश्चितता का प्रतीक है।
इस समय कोई भी नया कार्य, जैसे व्यापार की शुरुआत, यात्रा, विवाह, या कोई धार्मिक अनुष्ठान आरंभ करना वर्जित माना जाता है।
मान्यता है कि राहुकाल में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं या वे सफल नहीं होते। हालांकि, पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।
आज का राहुकाल (28 अगस्त 2025, गुरुवार):
- समय: दोपहर 01:58 बजे से 03:35 बजे तक
- दिशाशूल: दक्षिण दिशा में यात्रा से बचें
- क्या न करें:
- नया व्यापार या निवेश शुरू न करें
- कोई धार्मिक अनुष्ठान या पूजा आरंभ न करें
- विवाह या सगाई जैसे मांगलिक कार्य न करें
- क्या कर सकते हैं:
- ध्यान, जप, या आत्मचिंतन
- पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखना
- मानसिक तैयारी और योजना बनाना
आज के शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:28 से 05:12 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:56 से 12:48 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:22 तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:47 से 07:09 तक
- संध्या मुहूर्त: शाम 06:47 से 07:54 तक
- अमृत काल: रात 01:46 से 03:34 (29 अगस्त को)
इन समयों में कोई भी शुभ कार्य, पूजा, यात्रा या नया आरंभ करना अत्यंत फलदायक माना जाता है।
आज का पंचांग (28 अगस्त 2025):
- तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी (05:56 PM तक), इसके बाद षष्ठी तिथि
- वार: गुरुवार
- नक्षत्र: चित्रा (08:43 AM तक), फिर स्वाती
- योग: शुक्ल (01:18 PM तक), फिर ब्रह्म
- करण: बालव (05:56 PM तक), फिर कौलव
- सूर्योदय: 05:57 AM
- सूर्यास्त: 06:47 PM
- चंद्रमा: तुला राशि में गोचर
आज का धार्मिक महत्व:
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र है। भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है, जिसका उद्देश्य रजस्वला दोष से शुद्धि प्राप्त करना और सप्त ऋषियों को श्रद्धांजलि देना होता है। इसके अलावा आज संवत्सरी पर्व और स्कन्द षष्ठी भी मनाए जा रहे हैं, जो आत्मशुद्धि और भगवान स्कन्द की आराधना से जुड़े हैं।
गुरुवार का दिन होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायक मानी जाती है। व्रत रखने वाले भक्तों को आज विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
निष्कर्ष:
आज का दिन आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि और संयम का है। राहुकाल से बचकर शुभ मुहूर्त में कार्य करने से सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। पंचांग के अनुसार आज का दिन व्रत, पूजा और ध्यान के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
Disclaimer (www.the4thpillar.live):
यह जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन देना है। किसी भी निर्णय को लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। www.the4thpillar.live इस जानकारी की पूर्णता या सटीकता की पुष्टि नहीं करता।