Rakhi Special: रक्षासूत्र की परंपरा: इंद्राणी से द्रौपदी तक, राखी के शुभ मुहूर्त और ऐतिहासिक महत्व पर एक विशेष रिपोर्ट


रक्षाबंधन 2025: दिन भर के शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन इस वर्ष शनिवार, 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण पूर्णिमा है, और भद्रा काल प्रातःकाल में समाप्त हो रहा है, जिससे दिन भर राखी बांधने के लिए कई शुभ अवसर उपलब्ध हैं।

मुहूर्तसमय
सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त (भद्रा समाप्ति के बाद)सुबह 05:58 से 10:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:17 से 12:53 बजे तक
अमृत मुहूर्तशाम 03:46 से 05:26 बजे तक
गोधूलि बेलाशाम 07:06 से 07:27 बजे तक
सौभाग्य योगसुबह 04:08 से अगले दिन 02:15 बजे तक
राहुकाल (राखी न बांधें)सुबह 09:02 से 10:41 बजे तक

सुझाव: राखी बांधने के लिए सुबह 05:58 से 10:43 का समय सबसे शुभ है, क्योंकि यह भद्रा रहित है और पूर्ण फलदायक माना गया है। 


रक्षाबंधन की गांठे

त्रिगांठ परंपरा:
राखी बांधते समय तीन गांठें लगाई जाती हैं:

  1. ब्रह्मा जी को समर्पित – नई शुरुआत
  2. विष्णु जी को – रक्षा और समृद्धि
  3. महादेव को – मोक्ष और सुरक्षा

रक्षासूत्र मंत्र:

ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इतिहास की परतों में राखी: कहानियाँ जो आज भी जीवित हैं

रक्षाबंधन की शुरुआत का कोई एक निश्चित वर्ष नहीं है, लेकिन इसके उल्लेख महाभारत, भविष्य पुराण, और राजपूत इतिहास में मिलते हैं। कुछ प्रमुख ऐतिहासिक प्रसंग:

1. द्रौपदी और श्रीकृष्ण

जब श्रीकृष्ण की उंगली कट गई, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा। कृष्ण ने उसकी लाज की रक्षा का वचन दिया। यह घटना राखी के भावनात्मक मूल को दर्शाती है।

2. इंद्राणी और इंद्र

देवासुर संग्राम में इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे इंद्र को विजय प्राप्त हुई। यह सबसे पुराना उल्लेख माना जाता है।

3. रानी कर्णावती और हुमायूं

मेवाड़ की रानी ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने इसे सम्मानपूर्वक स्वीकार किया और रानी की रक्षा के लिए सेना भेजी।

4. सिकंदर की पत्नी और राजा पोरस

सिकंदर की पत्नी ने पोरस को राखी भेजी थी, जिससे युद्ध में पोरस ने सिकंदर को नहीं मारा।


राखी केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं

रक्षाबंधन की भावना धर्मों की सीमाओं से परे है। यह पर्व आज सांस्कृतिक समरसता और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।

धर्म/समुदायराखी की परंपरा
हिंदूपारंपरिक भाई-बहन का पर्व
मुस्लिम इतिहासरानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजी
ब्राह्मण परंपरापुजारी अपने यजमान को राखी बांधते हैं
सामाजिक परंपरामहिलाएं सैनिकों, पुलिसकर्मियों को राखी बांधती हैं
आधुनिक भारतपर्यावरण, पेड़-पौधों तक को राखी बांधने की परंपरा

🕊️ रक्षाबंधन आज एक सार्वभौमिक भावना बन चुका है, जो सुरक्षा, सम्मान और प्रेम का प्रतीक है—धर्म, जाति और सीमाओं से परे।


रक्षाबंधन का महत्व: एक धागा, अनेक अर्थ

  • भावनात्मक: भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती देने वाला पर्व।
  • आध्यात्मिक: आत्म-संयम, पवित्रता और रक्षा का प्रतीक।
  • सामाजिक: समाज के रक्षकों को सम्मान देने की परंपरा।
  • सांस्कृतिक: भारत की विविधता में एकता का उत्सव।

निष्कर्ष: रक्षासूत्र से जुड़ी एकता की डोर

रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संवेदनाओं, इतिहास और समरसता की जीवंत परंपरा है। 2025 में यह पर्व न केवल भाई-बहन के रिश्ते को बल्कि समाज के हर रक्षक को सम्मान देने का अवसर बन रहा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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