धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर हस्ताक्षर हो गया, आरक्षण विधेयक क्यों लटका हुआ है?- दीपक बैज
सरकार भरोसा दिलाये कानून का दुरुपयोग नही किया जायेगा

रायपुर । धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह विधेयक भाजपा के राजनैतिक एजेंडे का हिस्सा था इसलिये बिना कानूनी पहलू का परीक्षण किये ही राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिया जबकि इस विधेयक के प्रावधान राज्य के विषय क्षेत्र से बाहर था इसे तो राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिये भेजा जाना था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जब धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल का हस्ताक्षर हो गया है यह कानून का रूप धारण कर चुका है तो यह उम्मीद की जाती है कि इस कानून का दुरूपयोग सरकार किसी वर्ग के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों के हनन का माध्यम नही बनेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राजभवन में पिछले साढ़े तीन साल से छत्तीसगढ़ आरक्षण शंशोधन भी लंबित है। सरकार में उस विधेयक पर अध्ययन के लिये कमेटी भी बनाई है। उस विधयेक के संबंध में सरकार पहल कर राज्यपाल के हस्ताक्षर करवाने के लिये प्रयास क्यो नही करती है? धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भाजपा के एजेंडे से जुड़ा था तो इस पर तुरंत हस्ताक्षर हो गया आरक्षण शंशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर क्यों नही हो रहा है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत आरक्षण, अनुसूचित जाति के लिए उनकी आबादी के अनुरूप 13 प्रतिशत आरक्षण और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उस नवीन आरक्षण विधेयक 2022 में किया है। सभी वर्गो के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले ईडब्ल्यूएस के लिए भी 4 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था उस विधेयक में है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के षडयंत्र और दुर्भावना के चलते ही राजभवन की आड़ में आरक्षण विधेयक को लंबित रखा गया है।



